महाराष्ट्र: पूर्व पुलिस आयुक्त परमबीर सिंह के खिलाफ वसूली का एक और मामला दर्ज

 

 

 



मुंबई /   मुंबई पुलिस ने महानगर के पूर्व पुलिस आयुक्त परमबीर सिंह के खिलाफ बिल्डर-होटल व्यवसायी की एक शिकायत के आधार पर जबरन वसूली का एक और मामला दर्ज किया है। एक अधिकारी ने शनिवार को यह जानकारी दी। यह सिंह के खिलाफ चौथा और मुंबई में दूसरा ऐसा मामला है। दो अन्य मामले ठाणे शहर में दर्ज किए गए हैं। ये सभी प्राथमिकियां एक महीने के भीतर दर्ज हुई हैं। अधिकारी ने बताया कि नयी प्राथमिकी 48 वर्षीय बिल्डर बिमल अग्रवाल की शिकायत के आधार पर शुक्रवार रात को गोरेगांव पुलिस थाना में दर्ज की गई।उन्होंने बताया कि इस मामले में, बर्खास्त पुलिस अधिकारी सचिन वाजे और चार अन्य - सुमित सिंह उर्फ चिंटू, अल्पेश पटेल, विनय सिंह उर्फ बबलू और रियाज भाटी भी आरोपी के तौर पर नामजद किए गए हैं। अग्रवाल की शिकायत के अनुसार, आरोपियों ने दो बारों एवं रेस्तरां पर छापेमारी नहीं करने के एवज में उससे कई किस्तों में नौ लाख रुपये की उगाही की और उनके लिए लगभग 2.92 लाख रुपये के दो स्मार्टफोन खरीदने के लिए भी मजबूर किया। इन बारों एवं रेस्तरां को शिकायतकर्ता साझेदारी में चलाता था। शिकायत में कहा कि यह घटना जनवरी 2020 से मार्च 2021 के बीच हुई। अधिकारी ने बताया कि शिकायत के आधार पर छह आरोपियों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 384 और 385 (दोनों वसूली से संबंधित धाराएं) तथा धारा 34 के तहत मामला दर्ज कर लिया गया है और मामले में जांच जारी है। सिंह वर्तमान में डीजी होमगार्ड के पद पर तैनात हैं और बीमारी की छुट्टी पर होने के कारण मई से कार्यालय नहीं आ रहे हैं।22 जुलाई को मुंबई के मरीन ड्राइव पुलिस थाने ने सिंह, पांच अन्य पुलिसकर्मियों और दो अन्य लोगों के खिलाफ एक बिल्डर से कथित तौर पर 15 करोड़ रुपये मांगने के आरोप में प्राथमिकी दर्ज की थी। अगले दिन ठाणे के कोपरी थाने में उनके और कुछ अन्य पुलिस अधिकारियों के खिलाफ जबरन वसूली का एक और मामला दर्ज किया गया। वहीं व्यवसायी केतन तन्ना द्वारा दर्ज कराई गई शिकायत के आधार पर 30 जुलाई को वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी के खिलाफ ठाणे नगर पुलिस थाने में जबरन वसूली का एक और मामला दर्ज किया गया था। सिंह को मुंबई पुलिस आयुक्त के पद से इस साल मार्च में हटा दिया गया था जब मुंबई में उद्योगपति मुकेश अंबानी के घर के बाहर विस्फोटकों के साथ एक वाहन मिलने के मामले में बर्खास्त पुलिस अधिकारी सचिन वाजे को गिरफ्तार किया गया था। सिंह ने बाद में राज्य के तत्कालीन गृह मंत्री अनिल देशमुख पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाया था। उसके बाद देशमुख ने अप्रैल में अपने पद से इस्तीफा दे दिया था। पुलिस ने कहा कि जबरन वसूली के इस ताजा मामले में शिकायतकर्ता अग्रवाल को 26/11 मुंबई आतंकवादी हमलों के बाद 2009 में महाराष्ट्र पुलिस विभाग के लिए बम निरोधक सूट, एक ‘टोटल कंटेनमेंट व्हीकल’ (टीसीवी) और एक रोबोट प्रदान करने का ठेका मिला था।पुलिस ने कहा कि मार्च 2012 में अग्रवाल के खिलाफ मुंबई पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) में एक मामला दर्ज किया गया और उसे 2017 में सीबीआई और ईडी द्वारा गिरफ्तार भी किया। गोरेगांव पुलिस ने अग्रवाल का बयान उसकी शिकायत के संबंध में दर्ज किया, जिसमें उसने कहा कि फरवरी 2020 में सचिन वाजे ने उससे मुलाकात की थी और उसे बताया था कि परमबीर सिंह जल्द ही मुंबई के पुलिस आयुक्त बन जाएंगे। बयान के अनुसार अग्रवाल ने कहा कि वाजे ने उसे अपना होटल व्यवसाय फिर से शुरू करने के लिए कहा और चीजों का प्रबंधन करने का आश्वासन दिया क्योंकि होटलों से वसूली का काम उसे मिलने वाला था। बयान के अनुसार अग्रवाल ने तब साझेदारी में एक होटल शुरू किया था, लेकिन मार्च 2020 से यह कोविड-19 के कारण बंद था। बयान के अनुसार चूंकि परमबीर सिंह जल्द ही मुंबई के पुलिस आयुक्त बन गए और वाजे को क्राइम इंटेलिजेंस यूनिट (सीआईयू) का प्रभारी बनाया गया, अग्रवाल ने इस भय से होटलों से वसूली में उसकी मदद करने का फैसला किया कि उसका व्यवसाय दिक्कत में फंस सकता है। बयान के अनुसाार वाजे ने अग्रवाल को 31 अगस्त, 2020 को अपराध शाखा के कांदिवली कार्यालय में बुलाया, जहां अधिकारी ने कहा कि उसे नंबर-1 द्वारा बताया गया है कि उन्हें कोविड​​​​-19 के कारण प्रति माह 6 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है और घाटे की भरपायी के लिए उसे रोजाना 2 करोड़ रुपये जुटाने का लक्ष्य दिया गया है।अग्रवाल ने अपने बयान में दावा किया कि वाजे ने कहा कि परमबीर सिंह ने उसे सभी सट्टेबाजों के साथ सेटिंग करने के लिए कहा है, जिन्हें मुंबई से अपना व्यवसाय शुरू करने की अनुमति दी जाएगी। बयान में कहा गया है कि वाजे ने अग्रवाल से कहा कि वह नंबर-1 से जबरदस्त दबाव का सामना कर रहा है और उसे होटल, बार और सट्टेबाजों से वसूली से संबंधित सभी जानकारी प्रदान करके उसकी मदद करनी चाहिए, अन्यथा वह उसे व्यवसाय भी संचालित नहीं करने देगा।बयान में कहा गया है कि हालांकि कोविड-19 के कारण होटल उद्योग अभी तक खुला नहीं था लेकिन वाजे वसूली के लिए अधिक बेताब था। अग्रवाल ने बयान में दावा किया, बैठक के दौरान अग्रवाल ने वाजे को होटल और बार से और सट्टेबाजों से वसूली के लिए दो व्यक्तियों की मदद लेने के लिए कहा। बयान के अनुसार तदनुसार, वाजे ने संबंधित व्यक्ति को बुलाया और उससे कहा कि अब से उसे सटोरियों से की गई पूरी वसूली परमबीर सिंह को ही देनी है।