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त्रिपुरा हिंसा : सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और राज्‍य सरकार को दो हफ्ते के भीतर जवाब देने के दिए निर्देश

    नई दिल्‍ली /   सुप्रीम कोर्ट त्रिपुरा में हाल ही में हुई सांप्रदायिक हिंसा के मामले में राज्य पुलिस की कथित मिली-भगत और निष्क्रियता के आरोपों की स्वतंत्र जांच के लिए दाखिल याचिका पर सुनवाई के लिए सहमत हो गया है। सुप्रीम कोर्ट ने इस याचिका पर सोमवार को केंद्र और राज्य सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। न्यायमूर्ति डीवाई चन्द्रचूड़ और न्यायमूर्ति एएस बोपन्ना की पीठ ने सरकारों को दो हफ्ते के भीतर जवाब देने का निर्देश दिया है।  अधिवक्ता ई. हाशमी की ओर से दाखिल याचिका पर अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने पैरवी की। उन्‍होंने सर्वोच्‍च अदालत से कहा कि वे हालिया साम्प्रदायिक दंगों की स्वतंत्र जांच चाहते हैं। इस मामले में अब दो हफ्ते बाद सुनवाई होगी। भूषण ने कहा कि सर्वोच्‍च अदालत के समक्ष त्रिपुरा के कई मामले लंबित हैं। पत्रकारों पर यूएपीए के आरोप लगाए गए हैं। यही नहीं कुछ वकीलों को नोटिस भेजा गया है। पुलिस ने हिंसा के मामले में कोई एफआइआर दर्ज नहीं की है। ऐसे में अदालत की निगरानी में इसकी जांच एक स्वतंत्र समिति से कराई जानी चाहिए। इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने याचिका की प्रति केंद्रीय एजेंसी और

इजराइल में नेतन्याहू युग समाप्त,नयी सरकार शपथ लेने को तैयार

 


 यरूशलम / इजराइल में रविवार को नयी सरकार शपथ लेने जा रही है जिसके बाद प्रधानमंत्री बेंजमिन नेतन्याहू 12 साल के रिकॉर्ड शासन के बाद विपक्ष में बैठेंगे। इसी के साथ पिछले दो वर्षों में चार बार चुनाव होने के बाद उत्पन्न हुए राजनीतिक संकट का भी समाधान हो जाएगा। अति राष्ट्रवादी पार्टी के अध्यक्ष नफ्ताली बेनेट प्रधानमंत्री के तौर पर शपथ लेंगे। लेकिन अगर वह इस पद पर बने रहना चाहते हैं तो उन्हें दक्षिणपंथी, वामपंथी और उदारवादी पार्टियों के भारी-भरकम गठबंधन को बरकरार रखना होगा।सत्तारूढ़ गठबंधन में शामिल होकर इतिहास रच रहे एक छोटे अरब गुट समेत आठ दल नेतन्याहू का विरोध करने और नये सिरे से चुनाव कराने के खिलाफ एकजुट हुए हैं लेकिन बहुत कम मुद्दों पर सहमत हैं। उनके एक मामूली एजेंडा पर आगे बढ़ने की संभावना है जिसका मकसद फलस्तीनियों के साथ तनाव कम करने और बिना कोई बड़ी पहल शुरू किए अमेरिका के साथ अच्छे संबंध बरकरार रखने का है। भ्रष्टाचार के मामले में मुकदमे का सामना कर रहे नेतन्याहू संसद में सबसे बड़ी पार्टी के अध्यक्ष बने हुए हैं और समझा जाता है कि नयी सरकार का पुरजोर विरोध करेंगे। अगर एक भी गुट पीछे हटता है तो नयी सरकार अपना बहुमत गंवा देगी और सरकार गिरने का जोखिम पैदा हो जाएगा जिससे नेतन्याहू को सत्ता में लौटने का मौका मिल सकता है।नयी सरकार उतार-चढ़ाव भरे दो वर्षों में चार बार चुनाव होने, पिछले महीने गाजा के साथ 11 दिन तक युद्ध चलने और देश की अर्थव्यवस्था को तबाह करने वाले कोरोना वायरस प्रकोप के बाद सामान्य हालातों का वादा कर रही है। हालांकि, कोरोना वायरस के प्रकोप को सफल टीकाकरण अभियान के बाद काफी हद तक नियंत्रित कर लिया गया है। गठबंधन के पीछे की सबसे बड़ी ताकत याइर लापिद हैं। वह एक उदारवादी नेता हैं जो सरकार का कार्यकला लंबा चलने की स्थिति में दो वर्षों में प्रधानमंत्री बन सकते हैं।इजराइल की संसद ‘नेसेट’ स्थानीय समयानुसार शाम चार बजे नयी सरकार पर वोट के लिए बुलाई जाएगी। 120 सदस्यीय संसद में कम से कम 61 मतों के बहुमत से इसके जीतने की उम्मीद है जिसके बाद नयी सरकार शपथ लेगी। सरकार शाम में अपनी पहली आधिकारिक बैठक करने की योजना बना रही है। यह साफ नहीं है कि नेतन्याहू समारोह में शामिल होंगे। यह भी स्पष्ट नहीं है कि वह कब आधिकारिक आवास छोड़ेंगे।

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