सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

Featured Post

दिसंबर में उत्तराखंड आ सकते हैं राहुल गांधी,मोदी के दौरे पर होगा जबावी हमला

    देहरादून /  भाजपा द्वारा चुनावी तैयारियों को गति देने और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के दौरे के जवाब में कांग्रेस भी उत्तराखंड में राहुल गांधी का दौरा कराने की तैयारी में है। माना जा रहा है कि दिसंबर में कुमाऊं अथवा गढ़वाल मंडल में राहुल गांधी का दौरा कराया जाएगा। वहीं, चुनावी रणनीति पर चर्चा करने के लिए प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल रविवार को दिल्ली पहुंचे और प्रदेश प्रभारी देवेंद्र यादव से मुलाकात की। वह सोमवार को अन्य केंद्रीय पदाधिकारियों से भी मुलाकात करेंगे। आगामी विधानसभा चुनाव को देखते हुए कांग्रेस भी चुनाव की तैयारियों में जुटी हुई है। इस समय कांग्रेस के वरिष्ठ नेता प्रदेश भर में गांव-गांव कांग्रेस अभियान चला रहे हैं। इसके तहत विभिन्न इलाकों में रात्रि विश्राम और जनसभाओं का दौर चल रहा है। वहीं, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के दौरे के जवाब में कांग्रेस भी वरिष्ठ पार्टी नेताओं का प्रदेश में दौरा कराने की तैयारी कर रही है। इस कड़ी में दिसंबर माह में वरिष्ठ नेता राहुल गांधी की सभा कराने के लिए केंद्रीय नेतृत्व से वार्ता चल रही है। माना जा रहा है कि प्रदेश अध्यक्ष अपने दिल्ली दौरे क

यूपीः मिशन 2022चुनाव की तैयारी शुरू,बदलेगा प्रति पोलिंग बूथ वोटरों का मानक

  


उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव की तैयारी शुरू हो गई है। इन तैयारियों के पहले चरण में प्रति पोलिंग बूथ 1500 वोटर के मौजूदा मानक को बदला जाएगा। कोरोना संक्रमण में सतर्कता के चलते हाल ही में हुए पश्चिम बंगाल विधानसभा और इससे पहले हुए बिहार विधानसभा के चुनाव में प्रति पोलिंग बूथ 1000 वोटर का मानक रखा गया था। अब यूपी के मुख्य निर्वाचन अधिकारी की ओर से केन्द्रीय चुनाव आयोग को एक पत्र भेजा गया है। जिसमें राज्य के मतदान केन्द्रों पर प्रति पोलिंग बूथ वोटरों की संख्या कम किये जाने के बारे में सुझाव मांगा गया है।

जून के अंत या जुलाई से शुरू होगा पड़ताल का काम

प्राप्त जानकारी के अनुसार आयोग से निर्देश मिलते ही इसी जून के अंतिम सप्ताह से या जुलाई के पहले हफ्ते से प्रदेश के मतदान केन्द्रों और उनके पोलिंग बूथों की जांच पड़ताल का काम शुरू हो जाएगा। अनुमान है कि आयोग से मिले निर्देशों में प्रति पोलिंग बूथ 1000 या 1200 वोटर का मानक तय किया जाए। इस हिसाब से पोलिंग बूथों में बदलाव किया जाएगा। पोलिंग बूथों की संख्या भी बढ़ाई जाएगी। ऐसे में मतदान केन्द्र भी बदल सकता है यानि अभी तक आप जिस मतदान केन्द्र या जिस पोलिंग बूथ पर वोट डालते रहे हैं हो सकता है आगामी विधान सभा चुनाव में आपका पोलिंग बूथ या मतदान केन्द्र बदल जाए।
                                               
सितम्बर से वोटर लिस्ट का संक्षिप्त पुनरीक्षण

मतदान केन्द्र और पोलिंग बूथ की जांच पड़ताल और नये सिरे से पोलिंग बूथ तय करने का यह काम अगस्त तक चलेगा। उसके बाद सितम्बर से प्रदेश विधान सभा की वोटर लिस्ट का संक्षिप्त पुनरीक्षण शुरू हो जाएगा जो दिसम्बर के अंत तक चलेगा। इस नयी वोटर लिस्ट में अब तक छूटे हुए वोटरों के अलावा पहली जनवरी 2022 को 18 साल की उम्र पूरी करने वाले नये वोटर भी जोड़े जाएंगे।
बताते चलें कि  गोवा, मणिपुर, उत्तराखंड और पंजाब विधानसभाओं का कार्यकाल भी अगले साल मार्च की अलग-अलग तारीखों में खत्म हो रहा है। इसलिए उ.प्र.समेत इन चार राज्यों में भी एक साथ चुनाव करवाए जाएंगे।

15 जून को होगी देश भर के सीईओ की वर्चुअल कान्फ्रेंस

आगामी 15 जून को केन्द्रीय चुनाव आयोग ने देश भर के सभी राज्यों और केन्द्र शासित प्रदेशों के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों की वर्चुअल् कान्फ्रेंस बुलाई है। हर साल होने वाली इस महत्वपूर्ण बैठक में देश में चुनाव सुधारों पर चर्चा होती है। वैसे तो यह बैठक नई दिल्ली स्थित आयोग के मुख्यालय पर ही होती रही है। मगर इस बार कोरोना संकट की वजह से इसे वर्चुटल आयोजित किया जा रहा है। इस कान्फ्र्रेंस में उ.प्र. के मुख्य निर्वाचन अधिकारी अजय कुमार शुक्ल भी आनलाइन जुड़ेंगे। 

चल रही तैयारी

मुख्य निर्वाचन अधिकारी अजय कुमार शुक्ल ने बताया कि 'केन्द्रीय चुनाव आयोग के निर्देशों के अनुसार यूपी में विधान सभा चुनाव की तैयारी चल रही है। आगे जैसे-जैसे आयोग के दिशा निर्देश प्राप्त होते जाएंगे उसी के अनुरूप कार्यवाही आगे बढ़ती जाएगी।'

                    

यह भी जानें

यूपी की मौजूदा सत्रहवीं विधान सभा का गठन 14 मार्च 2017 को हुआ।इस विधान सभा की पहली बैठक 15 मई 2017 को हुई।इस हिसाब से मौजूदा विधान सभा का कार्यकाल 14 मई 2022 तक है।आगामी विधान सभा चुनाव के लिए केन्द्रीय चुनाव आयोग 14 मई 2022 से छह महीने पहले यानि 14 नवम्बर 2021 से यूपी को अपने दायरे में ले लेगा।केन्द्रीय चुनाव आयोग के दायरे में आने के बार राज्य के सभी अधिकारी व कर्मचारी डेपुटेशन पर आयोग के अधीन हो जाएंगे।इसके साथ ही आयोगइन छह महीनों में सुविधानुसार कभी भी विस का चुनाव करवाने को स्वतंत्र होगा।इसके अलावा शासन-प्रशासन में तीन या चार साल से एक ही पद पर बने हुए अधिकारियोंकर्मचारियों को उनके पद से हटाने की कार्यवाही भी शुरू हो जाती है।


Sources:Hindustansamachar

टिप्पणियाँ

Popular Post