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देवस्थानम बोर्ड को निरस्त करने की घोषणा का स्वागत

  उत्तराखंड सरकार ने आज देवस्थानम बोर्ड को निरस्त करने का  ऐतिहासिक फैसला लिया है । ब्राह्मण समाज महासंघ उत्तराखंड इस निर्णय का स्वागत करता है।करीब 2 वर्ष पहले जब यह नया कानून उत्तराखंड राज्य की देवभूमि में बना तभी से ब्राह्मण समाज महासंघ लगातार इसका विरोध करता आया है । मुख्यमंत्री व मुख्य सचिव को ज्ञापन देकर व सड़क पर आकर तीर्थ पुरोहित समाज के लिए उनकी रक्षा के लिए  ब्राह्मण समाज महासंघ सदैव इस कार्य में अग्रणी रहा है।गत 5 सितंबर को  देवभूमि की राजधानी देहरादून में गांधी पार्क पर ब्राह्मण समाज महासंघ ने एक विरोध प्रदर्शन तीर्थ पुरोहित जनेऊ  खंडित करने व देवस्थानम बोर्ड को भंग करने के लिए किया था। आज सरकार के इस निर्णय से देवभूमि के पुरोहित व पंडा समाज के सम्मान की रक्षा हुई है ।हम आशा करेंगे कि देवभूमि की सरकारें तीर्थ पुरोहित समाज, ब्राह्मण समाज का सम्मान व उनकी भावनाओं की रक्षा करते हुए इसी तरह से भविष्य में भी कार्य करेंगे।महासंघ के संरक्षक श्री लालचन्द शर्मा जी ने श्री राम परशुराम मन्दिर में चतुर्वेद विधालय में शिक्षा ग्रहण कर रहे सनातन धर्म के धर्म रक्षको व ब्राह्मण समाज महासंघ क

गज़ब-गज़ब-अस्पताल प्रशासन की बड़ी लापरवाही,मौत के 20 दिन बाद जिंदा हो गया कोरोना मरीज

  

 



उत्‍तर प्रदेश के मेरठ के एक अस्पताल की गलती ने बागपत के स्वास्थ्य विभाग की परेशानी को बढ़ा दिया है। अस्पताल में उपचार करा रहे कोरोना संक्रमित को करीब 20 दिन पहले ही मृत दर्शा दिया गया। पोर्टल पर भी उसकी मौत दर्शाई गई। बागपत के अधिकारियों ने संदेह होने पर वेरिफिकेशन किया, तो मृत दर्शाया गया रोगी जिंदा मिला। इसके बाद पोर्टल से बुधवार को मृत व्यक्ति का नाम हटा दिया गया।कोरोना की दूसरी लहर ने बागपत जिले में भी खूब कोहराम मचाया। अप्रैल व मई माह से करीब 100 लोगों की मौत हो गई, जबकि 7 हजार से अधिक लोग वायरस से संक्रमित हुए। हालात ऐसे बन गए थे कि कोरोना संक्रमित उपचार कराने के लिए बागपत के साथ ही मेरठ और गाजियाबाद के अस्पतालों में भर्ती होने लग गए थे। बागपत से भी गंभीर रोगियों को मेरठ रेफर किया जा रहा था। इसी दौरान बागपत शहर का एक रोगी मेरठ के एक अस्पताल में भर्ती हुआ। उसकी हालत गंभीर थी। इस दौरान अस्पताल प्रशासन से बड़ी चूक हो गई। उसने जिंदा रोगी को मृत दर्शा दिया।उसकी रिपोर्ट करीब 20 दिन पूर्व बागपत प्रशासन को भेज दी गई थी। रोगी की मौत को पोर्टल पर भी दर्शा दिया। अब स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को एक नाम के दो व्यक्तियों की मौत पोर्टल पर देख संदेह हुआ। इसके बाद उसने वेरिफिकेशन कराया। वेरिफिकेशन में पता चला कि जिस रोगी को मेरठ के अस्पताल द्वारा मृत दर्शाया गया था, वह जिंदा मिला। बुधवार को स्वास्थ्य विभाग ने उच्चाधिकारियों को अवगत कराते हुए उसके नाम को पोर्टल से हटा दिया। सीएमओ डा. आरके टन्डन ने बताया कि मेरठ के एक अस्पताल से चूक हुई थी। उसने जिंदा व्यक्ति को मृत दर्शा दिया था। पोर्टल से मृत दर्शाए गए व्यक्ति के नाम को हटा दिया गया है।

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