आक्सीजन लेबल अन्डर 50 आने के बाद भी स्वस्थ हुये कोरोना मरीज

 

 


कोरोना जब अपने चरम पर था और शमशान घाटों पर अंतिम संस्कार के लिए शव की लंबी लाइन थी। फेफड़ो में संक्रमण के बाद ऑक्सीजन लेवल गिरने पर जब एल 3 श्रेणी के अस्पताल का संकट गहरा रहा था तब एक महिला संक्रमित मरीज का ऑक्सीजन लेवल 30 तक आ गया था। उनकी सांसे उखड़ने लगीं। किसी तरह वह एल. 1 श्रेणी के आइसोलेशन सेंटर में भर्ती हुईं। सकारात्मक सोच और दृढ़ इच्छाशक्ति से वह महिला आइसोलेशन सेंटर में ठीक हुई। कुछ ऑक्सीजन की मदद से उनकी रिकवरी हुई।

यह एक मिसाल है। कहने को तो वेंटिलेटर वाले बड़े और आधुनिक सुविधाओं वाले अस्पताल कोरोना संक्रमित मरीज के परिवारीजनों से लाखों रुपए का मोटा बिल वसूल रहे हैं। वही दूसरी ओर एक सरकारी स्कूल के कमरों में चल रहे आइसोलेशन सेंटर में गंभीर कोरोना संक्रमित रोगी स्वस्थ हुए हैं। ऑक्सीजन लेवल के कोरोना के संक्रमण के आधार पर अस्पतालों में उनकी श्रेणी तय की जाती है। ऑक्सीजन लेवल 45 से कम होने पर मरीजो को वेंटिलेटर वाले एल 3 श्रेणी के अस्पतालों में भर्ती होने की सलाह दी जाती है।।जबकि ऑक्सीजन लेवल 45 से 80 होने पर ऑक्सीजन वाले एल 2 और 80 से अधिक होने पर एल 1 श्रेणी के अस्पताल की जरूरत पड़ती है। छावनी परिषद ने तोपखाना स्थित आरए बाजार इंटर कॉलेज में एल 1 श्रेणी का 40 बेड का आइसोलेशन सेंटर कम संसाधनों के बीच बनाया है। यहां 84 साल की एक महिला का ऑक्सीजन लेवल 50 होने पर भर्ती कराया गया था। इस महिला ने  एल 1 श्रेणी अस्पताल में रहकर कोरोना को हराया। जबकि एक व्यक्ति का ऑक्सीजन लेवल 45 और दूसरे का 60 ऑक्सीजन लेवल पहुंचने पर भी स्वस्थ हुए।