10 दिन मस्जिदों में ही रहकर इबादत करेंगे अकीदतमंद

  

 

बरकतों, नेमतों, अजमतों का महीना मुकद्दस माह-ए-रमजान में 10 दिन तक अकीदतमंद मस्जिदों में रहकर ही इबादत करेंगे। रमजान के आखिरी अशरा (हिस्सा) शुरू होने पर अकीदतमंद एतकाफ यानी एकांत में इबादत करने के लिए मस्जिदों में बैठ गए हैं। हर मस्जिदों में दो से तीन अकीदतमंद एतकाफ में हैं। ईद का चांद नजर आने पर एतकाफ खत्म होगा। इसमें विशेष तौर पर इबादत की जाती है। इसके अलावा इस अशरे में पड़ने वाली विशेष पांच रातों में जागकर इबादत भी की जाएगी।मदीना मस्जिद के पेश इमाम हाफिज मेहताब आलम ने रमजान और एतकाफ की बजीलत बयान करते हुए बताया कि माह-ए-रमजान को इस्लामिक कैलेंडर के हिसाब से दस-दस दिन के तीन अशरों (हिस्सों) में बांटा गया है। पहला रहमत का अशरा दस रोजे तक होता है। मगफिरत का दूसरा 11वें रोजे से शुरू होकर 20 रोजे तक होता है। इसके बाद 21 वें रोजे से जहन्नुम से निजात का तीसरा यानी रमजान का आखिरी हिस्से की शुरुआत हो गई। उन्होंने बताया कि पैगंबर मुहम्मद साहब ने माह-ए-रमजान में पूरी पाबंदी के साथ एतकाफ किया है। इसलिए इसका दर्जा बहुत बड़ा होता है। आखिरी अशरा शुरू होने के साथ लोग एतकाफ में बैठकर इबादत कर रहे हैं। पुरुष मस्जिद और महिलाएं घरों में एतकाफ में रहकर इबादत करेंगी। कोरोना माहमारी से निजात के लिए विशेष तौर पर दुआएं की जा रही हैं।