रात का मसीहा



 जीशान सिद्दिकी



यूं तो मसीहा शब्द ही अपने आप में वो मर्तबा रखता है जिसके आगे सारे क्रियाकलाप फीके हैं। मसीहा का शब्दिक अर्थ ही मानव को जीवित रखने वाला है लेकिन ये खब्द भी सियासत और स्वार्थ की भेट चढ़ गया है। हमारा देश उत्सवों का देश है जहां हर माह कोई न कोई उत्सव रहता ही है। लेकिन भारत जैसे बड़े लोकतंत्र मे एक उत्सव ऐसा भी हे जो सियासत की चासनी में लिपटा बेहद मीठा और जायकेदार होता है जिसे चुनाव कहा जाता है। आपने अक्सर देखा होगा कि इस चुनावी मौसम में हर किसी को अगर किसी से प्यार उमड़ता है तो वो है गरीब दबा कुचला निरीह व्यक्ति जिसके जिस्म पर मांस की पतली लेयर जरूर देखी जा सकती है जो अपने नेता के आगमन पर अपने पिचके गालों को बेवजह तकलीफ देते हुये हसने का असफल प्रयास करता है। दरअसल उसे लगता है कि शायद अब उसके भाग्य के दरवाजे खुल जाये देवता तुल्य नेता जी उसके सामने खडे हुये मानों कह रहे हों मांग क्या मांगता है और वो अपनी खीस निपोरते हुये दोनों हाथों को जोड़कर कहता है बस आपकी कृपा हमारे ऊपर बनी रहे लो जी नेता जी के पास पहले ही से आश्वासन की पोटली है बस उसमें से आश्वासन निकालकर उसे दिया और हो गये कृतज्ञ। ये एक भूमिका है जिसके माध्यम से मैं ये बताना चाह रहा था कि मसीहा के भी कई रूप कई मुखौटे हैं जिसमें विश्वास और प्यार कम स्वार्थ ज्यादा होता है जिसके पीछे सिर्फ नायक बनने की कहानी झलकती है,लेकिन मैं वो सच कहने जा रहा हूं जिसने सही मायनों में मसीहा शब्द की सही परिभाषा देते हुये मुझे सोचने पर मजबूर कर दिया। दरअसल कल रात मैं अपने घर की गली के पास खड़ा हुआ था कि सामने से एक मोटरबाईक पर दो नौजवान आ रहे थे और उनके पीछे कम्बल लदे हूये थे कि अचानक मेरे पास आकर बाईक रोकीऔर कहा कि इस सर्द मौसम मे गरीबों,यतीमों को कम्बल ंबांट रहा हूं आप भी नाम बता दो जिससे कम्बल उन तक पहुच सकें। मैं उन नौजवानों को अपलक निहारता रहा और सोचने पर मजबूर हो गया कि दिखावटी और अपने नाम के लिए स्वार्थ का चोला पहनकर गरीबों का उपहास उड़ाने बालों से हटकर ये सही मायनों में मसीहा है, जो रात के अन्धेरों में सर्दी से कांप रहे एक ही गर्म कपड़े में कई लोगों को चिपके हुये लिपटे हुये लोगों को गर्माहट देने की हसरत लिए घूम रहे है। मैंने सोचा कि अगर कोई सियासी व्यक्ति होगा भी तो वो खुद सामनेेेेे न आकर इस नेक काम को करा रहा है जो अपने लिए सियासत का घर नहीं वल्कि लोगों के दिलों में अपना घर बना रहा हैं, जो सही मायनों में मसीहा कहलाने का हकदार है।   



इसे देख लो फिर लगा दूंगा

Sources:Zeeshsn Siddiqi