वजूद की लड़ाई लड़ रहा ऐतिहासिक गोरखा इंटर कॉलेज

 

 देहरादून / उत्तराखंड और देश को फुटबॉल और बॉक्सिंग के जाने-माने खिलाड़ी देने वाले ऐतहासिक गोरखा मिलिट्री इंटर कॉलेज आज अपने वजूद की लड़ाई लड़ रहा है। सेना की जमीन पर बने स्कूल की लीज अवधि खत्म होने के बाद से स्कूल के लिए समस्याएं शुरू हो गई हैं। लीज अवधि न्यूनतम किराये में ही आगे बढ़ाने की कई कोशिशें स्कूल प्रशासन कर चुका है, लेकिन इसका कोई खास लाभ नहीं हुआ।गोरखा मिलिट्री इंटर कॉलेज की नींव अंग्रेज शासन के समय 1925 में डाली गई थी। तत्कालीन समय में कैंट क्षेत्र में तैनात सेना की टुकड़ी के बच्चों के लिए स्कूल बनाया गया था। सेना की जमीन पर बने स्कूल के लिए उस समय 90 साल की लीज तैयार कर न्यूनतम दरों पर किराया तय किया गया। समय-समय पर सेना के अफसरों ने ही स्कूल की कमान भी संभाली।कुछ समय तक यह व्यवस्था चलने के बाद स्कूल संचालन के लिए सोसायटी बनाई गई। वर्तमान समय में स्कूल सहायता प्राप्त अशासकीय विद्यालय की श्रेणी में है। स्कूल का संचालन स्कूल की चयनित सोसायटी करती है। सरकार के नियमानुसार हर तीन साल में सोसायटी के लिए चुनाव भी आयोजित होते हैं, लेकिन साल 2015 में 90 साल की लीज की अवधि खत्म होने के बाद से स्कूल को रक्षा संपदा अधिकारी, मेरठ की ओर से किराया बढ़ाने और स्कूल खाली करने तक के नोटिस आ चुके हैं। विद्यालय के प्रधानाचार्य ज्योति प्रसाद जगूड़ी ने बताया कि स्कूल में कक्षा छह से कक्षा 12 तक कक्षाएं संचालित हो रही हैं। यहांं सैनिकों, पूर्व सैनिकों, अल्पवेतन भोगी कर्मचारियों के बच्चों को नाममात्र के शिक्षण शुल्क पर शिक्षा दी जा रही है। कक्षा छह से नौ तक के विद्यार्थियों को निश्शुल्क शिक्षा और पाठ्य पुस्तकें भी प्रदान की जा रही हैं।गोरखा मिलिट्री इंटर कॉलेज की पैरवी मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत भी रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह से कर चुके हैं। उन्होंने पिछले साल जुलाई महीने में रक्षा मंत्री को पत्र लिखकर गोरखा मिलिट्री इंटरमीडिएट कॉलेज के भवन और भूमि को न्यूनतम दरों पर पुन: लीज पर देने की अपील की थी। 

लीज रिन्यू नहीं होना है समस्या

विद्यालय के प्रधानाचार्य ज्योति प्रसाद जगूड़ी ने बताया कि विद्यालय को रक्षा विभाग द्वारा लीज पर दी गई भूमि अवधि नहीं बढ़ सकी है। इस क्रम में रक्षा संपदा अधिकारी, मेरठ ने पट्टा सृजन के पश्चात् निर्धारित दरों पर भाड़ा जमा करने का उल्लेख करते हुए इसविद्यालय भूमि की लीज अवधि बढ़ाने पर निर्णय नहीं लिया है। विद्यालय भवन और भूमि को खाली करने के लिए विद्यालय प्रबंधन को नोटिस दे दिया गया है। विद्यालय प्रबंध समिति के पास आय के अत्यंत सीमित संसाधन हैं। इस कारण बढ़ी हुई दरों पर लीज की धनराशि का भुगतान करने में प्रबंध समिति असमर्थ है।


Sources:JNN