कांवड़ यात्रा प्रतिबंध: जलाभिषेक के लिए कांवड़ की बजाय टैंकरों से ले जा सकते हैं गंगा जल

 


  कांवड़ यात्रा प्रतिबंध होने पर जलाभिषेक के लिए बैठक में एक विशेष विकल्प पर भी विचार किया गया है। इसके तहत क्षेत्र विशेष के लोग टैंकर से गंगाजल ले जा सकते हैं। इस टैंकर से जल लेकर स्थानीय मंदिरों में जलाभिषेक किया जा सकता है।दरअसल, कांवड़ यात्रा पर रोक रहेगी। ऐसे में शिव के अभिषेक के लिए गंगा जल उपलब्ध कराने के विकल्प पर विचार किया जा रहा है। डीजीपी अशोक कुमार ने बताया कि उन्होंने इस संबंध में सभी अधिकारियों से बात की है।इसके तहत प्रत्येक थाना स्तर पर तैयारी की जाने की जरूरत है। थाना पुलिस अपने क्षेत्र की कांवड़ समितियों के साथ बैठक करेगी। इसके बाद यदि उस क्षेत्र से एक हजार लोग कांवड़ लेकर आते हैं, उनमें से प्रतिनिधि के रूप में कुछ लोग टैंकर से गंगा जल ले जा सकते हैं।इसमें हरिद्वार पुलिस प्रशासन भी सहयोग करेगा। इससे न तो बेवजह भीड़ होगी और न ही आदेशों का उल्लंघन होगा। इस विकल्प पर लगभग सभी अधिकारियों ने सहमति जताई है।
 
बसों और ट्रेन में पहचाना होगी चुनौती 


सड़क मार्ग पर बॉर्डरों को प्राइवेट वाहनों के लिए तो बंद कर दिया जाएगा। असल चुनौती बसों और ट्रेन से आने वाले यात्रियों को पहचानने में होगी। इस बाबत भी पुलिस अधिकारियों का कहना है कि इंटेलीजेंस इसके लिए क्रियाशील रहेगी।

बॉर्डर पर रहेगा अतिरिक्त पुलिस बल 


डीजीपी ने बताया कि हरिद्वार की सीमाओं पर यात्रा अवधि में अतिरिक्त चौकसी बरती जाएगी। पिछले साल उत्तर प्रदेश और अन्य राज्यों की जनता ने सहयोग किया था। इसके लिए कुछ दिनों तक ही सख्ती बरती गई थी। इसके बाद ढिलाई भी हुई, लेकिन फिर भी जनता नहीं आई थी। अब इस साल भी सभी बॉर्डरों पर अतिरिक्त पुलिस बल को लगाया जाएगा।

केवल 1.6 प्रतिशत होते हैं स्थानीय श्रद्धालु 


कांवड़ मेले में जल लेने के लिए स्थानीय लोगों की संख्या बेहद कम रहती है। वर्ष 2019 में कांवड़ मेले में करीब तीन करोड़ श्रद्धालु आए थे। इनमें से स्थानीय यात्रियों की संख्या महज 1.6 प्रतिशत थी। सबसे अधिक हरिद्वार 32 प्रतिशत और फिर उत्तर प्रदेश 27 फीसदी थी। पिछले साल कांवड़ यात्रा नहीं हुई थी।

Sources:Agency News