हरेला पर्व उत्तराखंड की सांस्कृतिक परंपरा का प्रतीक:महापौर अनीता ममगाईं

 


  ऋषिकेश / धार्मिक एवं पर्यटन नगरी ऋषिकेश में हरेला पर्व पर नगर निगम ने प्रशासन के सहयोग से शहर में विभिन्न स्थानों पर हजारों पौधे रोपे। रम्भा नदी का उद्गम स्थल पर संतों एवं महंतों की गरिमामय उपस्थिति में प्रकृति तले गायत्री मंत्रों के बीचपर्यावरण संरक्षण के लिए सजग नहीं रहेंगे तो पृथ्वी पर जीवन का बचना बहुत मुश्किल हो जायेगा। कार्यक्रम में अति विशिष्ट अतिथि के रूप में मौजूद रहे परमार्थ निकेतन के परमाध्यक्ष स्वामी चिदानंद सरस्वती ने कहा कि वनों से हमें अनेक प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष लाभ मिलते हैं। अनेक प्रकार की जड़ी-बूटियां मिलती हैं। जिनका प्रयोग औषधियां बनाने में किया जाता है। भारत में लाखों लोग वनों पर आधारित उद्योगों में कार्य कर आजीविका चलाते हैं। हरेला पर्व पर फलदार व कृषि उपयोगी पौधा रोपण की परंपरा है।इस अवसर पर महामंडलेश्वर ईश्वर दास महाराज,शांभवी पीठाधीश्वर आनंद स्वरूप भारती महाराज,रामानुजाचार्य गोपालाचार्य महाराज,महंत लोकेश दास महाराज,तुलसी मानस मंदिर के अध्यक्ष पंडित रवि शास्त्री, ब्रह्मानंद महाराज, आत्मानंद महाराज अखंडानंद महाराज, साध्वी यशोदा, महंत सुखविंदर स्वतंत्रा चैतन्य, चैतली चैतन्य, रजनी बिष्ट, मंडल अध्यक्ष महिला मोर्चा वीरभद्र मंडल, नेहा नेगी सदस्य उत्तर रेलवे बोर्ड, यशवंत रावत, ममता नेगी मोजूद रहे।