सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

Featured Post

नए वेरिएंट फैलने की आशंका : आश्रमों और गेस्ट हाउस में भी देना होगा अब कोरोना जांच का प्रमाणपत्र

  मथुरा / उत्तर प्रदेश के मथुरा जनपद में वृन्दावन शहर में दस विदेशी एवं एक देशी नागरिक के कोरोना संक्रमित पाए जाने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने सभी गेस्ट हाउसों एवं आश्रमों को कहा है कि वे अपने आने वाले हर देशी-विदेशी मेहमान का पूरा ब्योरा रखें और उनके पास कोरोना जांच का नेगेटिव प्रमाण पत्र होने के बाद ही उन्हें अपने यहां ठहराएं। गौरतलब है कि लंबे समय तक कोरोना वायरस का मामला नहीं आने के बाद बरती गई लापरवाही के बाद अब फिर से कोरोना संक्रमितों के मिलने का सिलसिला चल पड़ा है। वृन्दावन में पिछले सप्ताह से अब तक दस विदेशी एवं एक उड़ीसा की भारतीय नागरिक संक्रमित पाई जा चुकी है। तीन विदेशी जिला स्तर पर कोई सूचना दिए बिना यहां से लौट भी चुके हैं। मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. रचना गुप्ता ने कहा है कि गेस्ट हाउस एवं आश्रम बाहर से आने वाले व्यक्तियों के रुकने से पूर्व उनके कोविड वैक्सीनेशन प्रमाणपत्र एवं कोविड-19 जांच रिपोर्ट प्राप्त कर ही उन्हें ठहराएं तथा ऐसा नहीं होने पर वे तत्काल स्वास्थ्य विभाग के नियंत्रण कक्ष को रिपोर्ट करें। उनके अनुसार नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। न

उत्तराखंड में तीन हजार मीटर की उंचाई पर मिली हिमालयन रेड फॉक्स की उपप्रजाति

 


 

 उत्तराखंड के पिथौरागढ जिले में मुनस्यारी के भुजानी और खलिया टॉप क्षेत्रों में 3000 मीटर की उंचाई पर वल्पस वल्पस ग्रिफिथी के नाम से जानी जाने वाली हिमालयन रेड फॉक्स की एक उप प्रजाति मिली है । एक गैर सरकारी संगठन ने इसकी जानकारी दी है। पिछले 10 साल से उच्च हिमालयी पशुओं के संरक्षण के लिए काम कर रहे पशु प्रेमी और गैर सरकारी संगठन मोनाल के अध्यक्ष सुरेंद्र पंवार ने बताया, हिमालयन रेड फॉक्स की यह उप प्रजाति हाल के वर्षों में पहली बार अपने प्राकृतिक आवास से करीब 500 मीटर नीचे 3000 मीटर की उंचाई पर देखी गयी है।पंवार ने बताया कि दो साल तक खाक छानने के बाद हिमालयी क्षेत्र की इस उंचाई पर अभी तक वह रेड फॉक्स की कम से कम आठ उप प्रजातियां देख चुके हैं। सामान्यत: शर्मीले माने जाने वाले इन पशुओं के कम उंचाई पर ज्यादा दिखने के कारण पूछे जाने पर पंवार ने कहा कि ऐसा उनके प्राकृतिक आवास में किसी अशांति के कारण हो सकता है।उन्होंने कहा कि इन पशुओं ने संभवत: हिमालयी क्षेत्रों में बचे खुचे भोजन पर अपना गुजारा करने के लिए नीचे बसी मानवीय बस्तियों की ओर आना शुरू किया हो। हांलांकि, पिथौरागढ़ के प्रभागीय वन अधिकारी विनय भार्गव ने वल्पस वल्पस ग्रिफिथि जैसे दुर्लभ उच्च हिमालयी पशुओं तथा मोनाल पक्षियों के ज्यादा दिखाई देने को लगातार चलाए जा रहे संरक्षण प्रयासों का नतीजा बताया। उन्होंने कहा, इन दुर्लभ जीवों के संरक्षण के लिए हमारे जागरूकता कार्यक्रमों के कारण दुर्लभ हिमालयी पक्षियों और पशुओं के झुंडों की संख्या बढी है।

 

Source:Hindustan samachar

टिप्पणियाँ

Popular Post

चित्र

बदायूं: बिसौली आरक्षित सीट को लेकर राजनीतिक दलों में गहन मंथन, भाजपा से सीट छीनने की फिराक में सपा आशुतोष मौर्य पर फिर खेल सकती है दांव