प्रेम,उर्जा,संरक्षण और पोषण की प्रतिमूर्ति है नारी

सुश्री सारिका प्रधान



सर्वप्रथम तो नारी शक्ति को महिला दिवस की हार्दिक शुभकामनाऐं। मैं महिलाओं का सदैव सम्मान करती हूं और उनकी पक्षधर भी हूं क्योंकि मैं स्वयं एक महिला हूं इसलिए महिलाओं के दर्द को अच्छी तरह से जानती हूं। लेकिन बाहर की दुनिया में जब देखती हूं तब महसूस होता है कि महिलाऐं सच में अपने जिस सम्मान की हकदार हैं वो उन्हें नहीं मिल पा रहा है। आये दिन महिलाओं, छात्राओं के साथ दुराचार के मामले सामने आ रहे हैं वो आज के राजनेताओं और राजनीतिक दलों के मुंह पर तमाचा है, जो महिला सशक्तिकरण और उन्हें सम्मान दिलाने की बात बडे़-बड़े मंचों पर करते हैं। आज के हालात में महिला  शक्ति जिन हालातों से गुजर रही है वो भाारत ऐसे देश के लिए शर्म की बात है जहां महिलाओं को प्राचीनकाल से ही सम्मान देने की प्रथा हो।

पता नहीं क्यों ऐसा लगता है कि हमारे देश की सभी राजनीतिक पार्टियां भारत को विकसित राष्ट्र की दुहाईयां देते नजर आते हैं, इतना ही नहीं हर महापुरूष की जयंती पर उन महापुरूषों का सम्मान करते हुऐ उनके आदर्शों पर चलने की शपथ लेते हैं, लेकिन उनका अनुसरण क्यों नहीं करते ? मुझे स्वामी विवेकानन्द जी का कथन याद आता है उन्होंने कहा था ‘ कोई राष्ट्र अपना तब तक पूर्ण विकास नहीं कर सकता’ जब तक महिलाओं को सम्मान न मिले। किसी भी सभ्य समाज की पहचान तभी हो सकती है जब उस समाज की महिलाओं के हालात बेहतर न हो, यानि सभ्य समाज की पहचान उस समाज की महिलाओं को देखकर जानी जा सकती है। महिला ही वंश परम्परा को आगे ले जानी वाली शक्ति है इसीलिए उसे जगत जननी कहा जाता है, लेकिन बेहद अफसोस की बात है कि प्राचीन काल से लेकर आधुनिक काल तक महिलाऐं ही उपेक्षित क्यों ?

आज भी महिलाओ के साथ पक्षपात का रवैया अपनाया जाता है, उन्हें कम से कम सुविधा और तरक्की के अधिकारों मे रखा जाता है जो ठीक नहीं कहा जा सकता है। जिस परिवेश मे हमने जन्म लिया उस परिवेश से बाहर आने मे समय लगता है लेकिन कितना ? क्या आजादी के सात दशकों बाद भी हम उससे  बाहर आना नहीं चाहते, पुरूष अपनी मानसिकता मे बदलाव लाने को क्यों नहीं तैयार होते ? हमारी सोच मे सिर्फ एक बात ही घर क्यों कर गई कि महिला सिर्फ और सिर्फ भोग का साधन है। बहुत अफसोस की बात है कि हिन्दुस्तान ऐसे देश में जो विश्व मानचित्र पर अपनी एक अलग पहचान रखता है उस देश में महिलाऐं अपने सम्मान अधिकार और सुरक्षा की गुहार लगायें बेहद शर्मनाक है। महिलायें शुरू से ही सम्मान की पात्र रही हैं मगर पुरूष प्रधान देश में समाज ने महिलाओ को हाशिये पर रखा हुआ है। हमारे देश में महिलाओं की एक बंड़ी आबादी आज भी मूलभूत सुविधाओं से महरूम है आखिर क्यों ? आज जरूरत है महिलाओं को मुख्यधारा से जोड़ने  की। 

महिलाऐं हमारे समाज का वो हिस्सा हैं जिसके वगैर सब कुछ अधूरा है। महिला का हमारे समाज में स्थान आला है , क्योंकि महिला के बिना पुरूष अधूरा है। लेकिन दुःख की बात ये है कि आज भी हमारा समाज पितृातमक व्यवस्था का शिकार है। अन्तर्राष्ट्रीय सम्मेलनों मे महिलाओं के सम्मान और अधिकारों की बात उठाई जाती हैं जिन पर पैसों को पानी की तरह बहाया जाता है लेकिन नतीजा ढाक के तीन पात जैसा रहता है। सरकार को ये सोचना होगा कि महिलाओं के शैक्षणिक स्तर को कैसे सुधारा जाये जो समानता दिलाने के लिए बहुत जरूरी है , जब स्त्री पढ़ेगी तो परिवार पढ़ेगा, परिवार से समाज और समाज से राष्ट्र और फिर विश्व शिक्षित होता है तभी महिलाओं को सम्मान और बराबरी का दर्जा मिल सकता है।

 हर बार महिला दिवस के अवसर पर राजीतिक पैरोकारों द्वारा महिलाओं को समाज मे आर्थिक,राजनैतिक और शैक्षिक मोर्चे पर लम्बी-चौड़ी   बात कही जाती रही हों लेकिन हालात मे कोई खास बदलाव देखने को नहीं मिल रहा है। सच तो ये है कि आज भी महिलायें अनेक मोर्चों पर भेदभाव का शिकार हैं। बहरहाल आज का दिवस भी मातृ दिवस  की तरह जोर-शोर से मनाया जाता है सियासी मंचों पर लम्बे-चौड़े  भाषणों के अलावा महिलाओं के लिए नई-नई योजनाओं का झुनझुना थमा दिया जाता है, लेकिन उसके बाद सब शून्य । इस पुरूष प्रधान देश में जहां पुरूषों मे अहंकार और महिलाओं को कमतर आंकने की मानसिकता घर कर गई  हो उससे उन्हें बाहर आना ही होगा, क्योंकि एक स्त्री ही किसी भी समय कहीं भी किसी भी हालातों का मुकाबला करने मे सक्षम है और उन हालातों का मुकाबला बहुत बहादुरी के साथ करती है। बहरहाल जब नारी सम्मान की बात कही जाती हो तो उसके लिए सिर्फ एक दिन ही मुकर्रर क्यों? हर दिन महिला का सम्मान करने वाली प्रवृति पुरूषों में कब आयेगी। पुरूषों को भी आज के दिन संकल्प लेना चाहिए कि वो नारी को सम्मान दिलाने के लिए अपनी मानसिकता मे बदलाव लायेंगे व उनके अधिकारों को दिलाने में अपनी महत्ती भूमिका निभायेंगे तभी इस दिवस को मनाने का मकसद सार्थक होगा।


साभार / लेखिका सुश्री सारिका प्रधान पूर्व दर्जा प्राप्त राज्यमंत्री हैं