नये साल में खुलेगा उम्मीदों का झरोखा - सारिका प्रधान

 



 यूं तो हर बार नये साल के आगमन से पहले उसके स्वागत की तैयारी में  हम सब व्यस्त हो जाते हैं और खो जाते हैं उम्मीदों की कल्पना में कि आने वाला साल हमारे जीवन में सुख समृद्धि बिखेरता हुआ आये। बस सिर्फ इसी कल्पना की नाव में हिचकोले खाते हुये हम बीते साल के कड़वे अनुभवों को भूल जाने का असफल प्रयास करते हैं लेकिन फिर भी उसकी टीस हमारे अन्दर से निकलने का नाम नहीं लेती। बीता साल 2020 ऐसा दर्द दे गया जिसे लम्बे समय तक नहीं भुलाया जा सकता। बीते साल एक अन्जानी सी महामारी ने न जाने कितनों को अपनों से जुदा किया जिन्होंने नये साल के लिए संकल्प लिये होंगे लेकिन विधि के विधान के आगे हम सब नतमस्तक हैं। एक तरफ इस महामारी ने न जाने कितनों को काल का ग्रास बना लिया वहीं न जाने कितने अननदाता सड़कों पर अपने हक की लड़ाई लड़ते-लड़ते दुनिया को अलविदा कह गये लेकिन आज भी वे हठधर्मी सरकार के रवैये से अन्नदाता हांड़ कंपा देने वाली सर्दी में भी संघर्ष कर रहे हैं। बहरहाल ये पूरा साल दर्दों से भरा रहा लेकिन हम सिर्फ ईश्वर से प्रार्थना कर सकते हैं कि आने वाला नया साल 2021 हर व्यक्ति के जीवन में खुशियां लाये इसी कामना के साथ मे सबको नये साल और लोहड़ी की शुभकामनाऐं देती हूं।