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अखिलेश ने बना रखा है पिता मुलायम को बंधक: प्रमोद गुप्ता

यू.पी में जैसे ही विधानसभा चुनाव का वक्त नजदीक आता जा रहा है दल-बदल का खेल भी चरम पर है । आपको बता दें कि बिधूना विधानसभा से विधायक विनय शाक्य और उनके भाई के सपा में शामिल होने के बाद से सियासी पारा और गर्म हो गया है।इसी क्रम में सपा संरक्षक मुलायम सिंह यादव के साढ़ू प्रमोद गुप्ता उर्फ एलएस भी पाला बदलने का ऐलान कर चुके हैं। जैसा की खबर है कि वह भाजपा में शामिल होने के लिए लखनऊ पहुंच चुके हैं। उनके भाजपा में जाने के बाद बिधूना की सियासत में एक बार फिर से उलट फेर के आसार दिख रहे हैं। माना ये जा रहा है कि सपा से प्रमोद प्रबल दावेदार थे लेकिन विनय व उनके समर्थकों के शामिल से होने से चुनावी गणित गड़बड़ा गई। वहीं कुछ लोग इसे प्रसपा सुप्रीमो शिवपाल द्वारा टिकट बंटवारे को लेकर अंदर खाने मची रार का असर बता रहे हैं। आपको मालूम हो बिधूना विधान सभा में प्रमोद गुप्ता एलएस पिछड़ी जाति पर अच्छी पकड़ रखते हैं। मुलायम सिंह की दूसरी पत्नी साधना गुप्ता ;अब साधना यादवद्ध के बहनोई हैं और मुलायम सिंह के साढू। वह एक बार टिकट न मिलने पर निर्दलीय नगर पंचायत का चुनाव लड़े और जीते थे। इसके बाद 2012 में सपा ने प

मौसम: दूसरे दिन भी खराब रहा मौसम ,ऊंची चोटियों पर बर्फबारी जारी



राजधानी दून व आसपास के इलाकों में पश्चिमी विक्षोभ की सक्रियता के चलते पूरे उत्तराखंड में मौसम का मिजाज एकाएक बदल गया है। जहां मैदानी इलाकों में बारिश और ऊंचाई वालें इलाकों में बर्फबारी से तापमान में भारी गिरावट दर्ज की गई है।आज देहरादून में सुबह से ही  बादल छाए रहे। वहीं चारधाम सहित ऊंची चोटियों पर बर्फबारी हुई है। उत्तरकाशी जिले  में मौसम खराब है। यमुनोत्रीधाम व आसपास की चोटियों पर बर्फबारी हुई है जबकि निचले इलाकों में बारिश से यहां ठंड बढ़ गई है लोग घरों में ही दुबके हुए है।

बदरीनाथ धाम में कल रात बर्फबारी हुई। फिलहाल चमोली जनपद में मौसम अभी भी खराब बना हुआ है। आसमान में घने बादल छाये हैं। यहां देर रात से आज  सुबह तक बारिश और बर्फबारी हुई है। ऊंचाई वाले क्षेत्रों में बर्फबारी जारी है। बर्फबारी कीवजह से  ऋषिकेश गंगोत्री हाईवे उत्तरकाशी में सुक्की टॉप के आगे बंद हो गया है। वहीं मसूरी में घने बादल छाए रहे यहां बारिश की संभावना बनी हुई है। कुमांऊ मंडल में बागेश्वर में कल रात को हल्की बारिश हुई और उच्च हिमालयी क्षेत्र में बर्फबारी हुई।आपको बता दें चंपावत, पिथौरागढ़, सितारगंज, अल्मोड़ा, डीडीहाट, नैनीताल, पंतनगर, जसपुर, रामनगर, हल्द्वानी, जसपुर, लोहाघाट, रुद्रपुर, चौखुटिया और बाजपुर सहित अधिकतर इलाकों में बादल छाए रहे। वहीं मौसम विभाग की ओर से जारी रिपोर्ट के मुताबिक बुधवार यानि आज राजधानी दून व आसपास के इलाकों में दिन का अधिकतम तापमान 15 डिग्री सेल्सियस जबकि न्यूनतम तापमान नौ डिग्री सेल्सियसरहेगा। अधिकतम और न्यूनतम तापमान में भारी गिरावट के चलते शीतलहर चलने  की संभावना है।  चिकित्सा विशेषज्ञों का कहना है कि तापमान में अचानक आई गिरावट और बारिश के चलते सर्दीए जुकामए बुखारए विंटर डायरिया के साथ ही माइग्रेन जैसी बीमारियों के होने की पूरी संभावना है। ऐसे में लोगों को सावधानी बरतने की जरूरत है। दून अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक और  वरिष्ठ फिजीशियन डॉण् केसी पंत का कहना है कि मौसम का जो मिजाज देखने को मिल रहा है। उसे देखते हुए थोड़ा सावधान रहने की जरूरत है। घर से बाहर जब भी निकलें गर्म कपड़े पहनने के साथ ही ठंडक से बचने का पूरा इंतजाम करें।  

 परियोजना के नोडल अधिकारी प्रोण् आशीष पांडेय ने बताया कि मौसम विभाग से प्राप्त सूचना के अनुसार न्यूमेरिकल वेदर प्रिडिक्शन मॉडल के विश्लेषण से प्राप्त संकेतों के अनुसार एक पश्चिमी विक्षोभ विकसित हुआ है। इसका प्रभाव 4 से 6 जनवरी तक के मौसम को प्रभावित कर सकता है। इसके बाद एक अन्य पश्चिमी विक्षोभ और राजस्थानए पंजाब व समीपवर्ती क्षेत्रों में चक्रवातीय प्रभाव के कारण 7 से 9 जनवरी तक मौसम में प्रभाव देखने को मिल सकता है। इनके प्रभाव से हरिद्वार में 5 और 8 जनवरी को हल्की बरसात हो सकती है जबकि देहरादून व पौड़ी गढ़वाल में हल्की से मध्यम बारिश की संभावना है। 6 व 7 जनवरी को दिन का तापमान गिर जाने से कोल्ड डे कंडीशन रह सकती है। 

परियोजना के तकनीकी अधिकारी डॉण् अरविंद कुमार ने किसान भाइयों को सलाह जारी करते हुए कहा कि पशुपालक व मुर्गीपालक किसान भाइयों को विशेष सलाह दी जाती है कि वे 6 व 7जनवरी क ो पशुओं को पशुशाला में ही रखें। उन्हें ढक दें। पशुशाला में पत्तियों व पुआल इत्यादि का बिछावन अवश्य प्रयोग करें और जानवरों को ठंड से बचाने के लिए गुड़ की मांडी व अजवाइन का पानी अवश्य दें। मुर्गीघरों में मुर्गियों विशेषकर चूजों के लिए हीटर याअन्य उपकरणों की सहायता से अनुकूल तापमान बनाए रखें। साथ ही किसान इस सप्ताह फसलों की सिंचाई न करें। वहीं उर्वरकों व कीटनाशकों के प्रयोग से बचें। 

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