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इंटरनेट मीडिया से हो रहे चुनाव प्रचार में ग्रामीण भारत का एक बड़ा वर्ग अछूता

जैसा कि आपको मालूम है कि कोविड-19 की गाइडलाईन को ध्यान में रखकर चुनाव आयोग ने वर्चुअल रैली और प्रचार प्रसार के निर्देश जारी किये थे। जैसा की आपको मालूम है कि इस वक्त देश के पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव हो रहे हैंऔर कोरोना की वजह से न तो रैलियां हो रही हैं और न ही रोड शो के जरिये राजनीतिक दल जनता के बीच अपना शक्ति प्रदर्शन ही कर पा रहे हैं।  लिहाजा सारा चुनाव प्रचार डिजिटल प्रारूप में ही सिमट कर रह गया है। गौरतलब है कि चुनाव आयोग की पाबंदी के कारण राजनीतिक दल और नेता इंटरनेट मीडिया के विभिन्न मंचों के जरिये जनता के बीच अपनी पैठ बनाने में लगे हैं। इन्हीं मंचों पर अपनी प्रचार सामग्री को परोसकर पार्टियां चुनाव में अपनी स्थिति को मजबूत करने में जुटी हैं। मतदाताओं को लुभाने के लिए इस बार राजनीतिक पार्टियां लोकगीतों के रूप में अपने अपने प्रचार गीत बनवाकर  इंटरनेट मीडिया के मंचों पर उन्हें साझा करके जनता के दिलोदिमाग पर छा जाने को बेताब हैं। इस संग्राम में आगे निकल जाने की स्पर्धा लगभग सभी दलों में दिखाई दे रही है। ऐसे में यहां यह सवाल तैर रहा है कि लोकतंत्र के इस चुनावी त्योहार में क्या यह

पाक सीमा से 30 किमी दूर फंसा था पी.एम का काफिला,पहले हो चुका था धमाका

 


प्रधानमंत्री का काफिला कल तकरीबन 20 मिनट तक अत्यंत संवेदनशील और असुरक्षित एरिया में रुका रहा। इस दौरान अधिकारियों की सांसें थम गईं। वजह यह थी कि जिस इलाके में मोदी का काफिला रुका थाए वह आतंकियों के अलावा हेरोइन तस्करों का गढ़ माना जाता रहा है।आपको बता दें कि पिछले साल सितंबर माह में इसी इलाके में आतंकी वारदात को अंजाम दिया गया था। लिहाजा केंद्रीय गृह मंत्रालय के अलावा पीएम सिक्योरिटी के तमाम अधिकारियों के चेहरे पर परेशानी की लकीरें खिंचना जायज था।

गौरतलब है कि तलवाई भाई से कुछ ही दूरी पर जहां पी.एम का काफिला रुकाए वहां से भारत.पाक सीमा महज 30 किलोमीटर की दूरी पर है और इस क्षेत्र में लगातार टिफिन बम और अन्य विस्फोटक पदार्थ मिलते रहे हैं। जैसा कि मालूम हो कि जलालाबाद कस्बे में बीती 15 सितंबर 2021 में धमाका हुआ थाए वह भी फिरोजपुर के नजदीक है और केंद्रीय एजेंसियों की जांच में साफ हो चुका है कि वह आतंकी हमला था।


जानकारी के मुताबिक बठिंडा एयरपोर्ट पर उतरने के बाद प्रधानमंत्री सड़क के रास्ते फिरोजपुर के लिए रवाना हुए । उनका काफिला बठिंडा.फिरोजपुर फोरलेन से होते हुए निकला। एसपीजी प्रोटोकॉल के तहत प्रधानमंत्री के आने.जाने के लिए जो रूट इस्तेमाल किया जाता है उस रास्ते की हर तरह से जांच की जाती है । सुबह 7 बजे से 9 बजे तक हाईवे पर कहीं कोई रुकावट नहीं थी । दोपहर 12 बजे के बाद अचानक चीजें बिगड़ती चली गईं और किसान संगठनों के सदस्य व शरारती तत्व हाईवे तक पहुंचने में कामयाब हो गए ।


सूत्रों के अनुसार रूट के बारे में प्रदर्शनकारियों को पहले ही पता चल चुका था । इसके बाद उन्होंने बगल के गांव प्यारेआणा में स्पीकर से घोषणा कर भीड़ इकट्ठी की और एक ट्रॉली लगाकर फ्लाईओवर को पूरी तरह जाम कर दिया जिसके चलते 1.20 पर पीएम का काफिला सड़क पर ही रुक गया । 

अधिकारियों की तरफ से लगातार वायरलेस कर जानकारी दी गई कि पीएम का काफिला रुक गया है । पंजाब पुलिस के अधिकारियों की सांसें भी थम गईं। अधिकारी वायरलेस पर मैसेज देते रहे । पंजाब पुलिस के अधिकारी इस इलाके की संवेदनशीलता से अच्छी तरह वाकिफ थे, क्योंकि इसी इलाके में एनआईए के अलावा पंजाब की काउंटर इंटेलिजेंस एजेंसियों का लगातार ऑपरेशन चल रहा है ।

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