क्या भाजपा कांग्रेस का राजनीतिक बिकल्प मिल सकता है उतराखंड को ?




 राजनीतिक समीक्षा

नरेश भारद्वाज

विगत दो वर्षों से बराबर निगाह जमाये बैठा था अपने उतराखंड के मतदाताओ पर. ग्रामीण मतदाताओ की कांग्रेस भाजपा से बराबर की दूरी और तीसरे बिकल्प की चाहत देख दिल हिलोरें मार रहा था की अब निश्चित ही तीसरा बिकल्प खड़ा होगा. लेकिन बस मात्र एक दिन पूर्व कांग्रेस से विधायक टिकट की चाहत में जुटे नेताओ का धरना प्रदर्शन देख मेरी ख़ुशी पर तो मानो तुषाराघात हो गया. सोई सरकार को जगाना बिपक्ष का कर्तव्य बनता है और इसके लिए धरना प्रदर्शन हो या सचिवालय घेराव बिलकुल जायज़ है. विरोध कांग्रेसियों के धरने प्रदर्शन से क़तई भी नही है. और विरोध के लिए लिख भी नहीं रहा. विरोध नही दुःख है. दुख इस बात का   है धरना प्रदर्शन उस व्यक्ति के नेतृत्व में हुआ जिनका क्षेत्रीय जनप्रतिनिधि के रूप में विकास की रिपोर्ट शून्य से ऊपर नही पहुँच पाई. बात कर रहे हैं लैंसडाउन विधान सभा अंतर्गत प्रखंड जैहरीखाल ब्लाक के ब्लाक प्रमुख श्री दीपक भण्डारी जी की. भण्डारी जी को अधिकार है शासन प्रशासन से सवाल पूछने का, लेकिन भ्रष्टाचार में आकंठ डूबे, विकाश में पिछडे  अपने ब्लाक  पर तो नज़र मारी होती, जहाँ के वे मुखिया हैं. ब्लाक प्रमुख जी के साथ प्रदर्शन में भीड़ कौन सी थी, बेशक जुटाई गई भीड़ रही हो, वही ग्रामीण थे जो विकास के लिये तरस रहे हैं. फिर इनसे कैसे उम्मीद करें की ये क़ाबिल प्रत्याक्षि को चुनेंगे. कांग्रेस से टिकट के दावेदार गाँव दर गाँव विकास ढूँढने भटक रहे हैं तो वहीं बर्तमान विधायक श्री दलीप रावत जी भी अनकिये कार्यों की विकास गाथा सुना रहे हैं. कांग्रेस भाजपा मतदाताओ को लुभा रहे हैं तो पूरा आभास हो रहा की अगली बाजी भी इन दोनो दलों में से किसी एक के ही हाथ लगेगी. इसके लिये मात्र मतदाता ही दोषी नहीं, दोषी हैं हमारे क्षेत्रीय दलदल जो एक संगठित दल बन  ग्रामीणों में बिस्वास नहीं जगा पा रहे हैं. मैंने पूर्व लेख में भी क्षेत्रीय दलों से आग्रह किया था की संयुक्त मोर्चा बना या किसी एक दल के बैनर तले चुनाव लड़ें जीतें और उतराखंड को पिछड़े प्रदेश से विकसित प्रदेश बनाने की दिशा में कार्य करें, लेकिन उतराखंड को तीसरा राजनीतिक बिकल्प मिलने की सम्भावना दूर दूर तक नज़र नही आ रही. भगवान बद्री केदार कोई चमत्कार कर दें तो कर दें.

नरेश भारद्वाज

समाजसेवी

सर्वोत्थान सेवा संस्थान