मसूरी पालिका अध्यक्ष हुये बेलगाम

  




जीरो टालरेंस सरकार की उड़ा रहे धज्जियां


यूं तो प्रदेश की सरकार के मुखिया गाहे-बगाहे अपने जीरो टालरेंस सरकार की दुहाहियां देते नहीं थकते लेकिन फिर भी करप्शन का कीड़ा बिलबिलाते हुये देखा जा सकता है इसके एक नहीं अनेक उदाहरण सामने आते रहें है लेकिन फिर भी उनके अधीनस्थ  भ्रष्टाचार की लम्बी लकीर खींचने से बाज नहीं आ रहे हें। इसका जीता-जागता उदाहरण पहाड़ों की रानी मसूरी में देखा जा सकता है जहां पालिका अध्यक्ष अनुज गुप्ता प्रदेश की जीरो टालरेंस सरकार की हवा निकालने में मशगूल हैं। यहां तो वही मिसाल हो गई‘‘ जब सैंया भये कोतवाल तो फिर डर काहे का’’जनाब पालिका अध्यक्ष ने अपने रूतबे और सरकारी रसूख का फायदा उठाते हुये पालिका स्वामित्व वाली भूमि को खुर्द-बुर्द करने का काम शुरू कर रखा है। जानकारी के मुताबिक गढ़ी कैंट निवासी जय बहादुर ने मसूरी पालिका अध्यक्ष के काले कारनामों को उजागर करते हुये एक प्रार्थना पत्र आयुक्त गढ़वाल को भी भेजा था लेकिन इस जीरो टालरेंस सरकार के जीरो हीरो इस पूरे मामले को ठंडे बस्ते में डालने की योजना बना चुके हैं क्योंकि अभी तक कोई  भी ठोस कार्यवाही का अमल में न आना इस बात की पुष्टि करता है। खैर पूरा मामला क्या है ये हम एक बार फिर बताते हैं। नगर पालिका मसूरी द्वारा इको टैक्स बैरियर, कोलूखेत के ठेकेदार आरसी कंस्ट्रक्शन कंपनी की बकाए की आरसी कटने के बाद अपने चहेते ठेकेदार को लाभ पहुंचाने के इरादे से बिना बताए अदा किए ठेका देकर तहसील व नगर पालिका परिषद मसूरी व प्रदेश सरकार   तथा केंद्र सरकार को टैक्स, जीएसटी व सेवा कर की करोड़ों रुपयों की आर्थिक हानि पहुंचाई है इतना ही नहीं पालिका अध्यक्ष अनुज गुप्ता ने रोपवे मसूरी, मसूरी झील, कोलूखेत को बिना टेंडर के ही अपने चहेते ठेकेदारों को मिलीभगत से आवंटित किए हैं। जिससे नगर पालिका प्रदेश सरकार तथा केंद्र सरकार को करोड़ों रुपयों के टैक्स का नुकसान पहुंचाया है वहीं पालिका अध्यक्ष ने जान-बूझकर ई-टेंडर प्रक्रिया को लागू नहीं किया है। अध्यक्ष नगर पालिका मसूरी द्वारा रोपवे मसूरी, मसूरी झील, कोलूखेत को बिना टेंडर के ही अपने चहेते ठेकेदारों को मिलीभगत से आवंटित किए हैं,जिससे नगर पालिका प्रदेश सरकार तथा केंद्र सरकार को करोड़ों रुपयों के टैक्स का नुकसान पहुंचाया है। अध्यक्ष श्री अनुज गुप्ता व उसके परिवार द्वारा ओकगोव झाड़ू झड़ीपानी मसूरी स्थित भारतीय रेलवे की जमीन को कब्जा कर अपना मकान बनाया है तथा अन्य कई लोगों को भारतीय रेलवे की जमीन विक्रय भी किया है। जिसमें जिसमें रेलवे द्वारा कई बार शिकायत करने के बावजूद भी मामला दबा पड़ा हुआ है। अध्यक्ष नगर पालिका मसूरी व उसके परिवार द्वारा झड़ीपानी में नियम कानून को ताक पर रखकर बैंक परिसर, दुकानों, फ्लैटों तथा बार्लोगंज मसूरी में होटल विंटर लाईन व गेस्ट हाउस का अवैध व अनुचित निर्माण किया है। जिससे सरकार को कर तथा फीस आदि से संबंधित लाखों रुपए की हानि पहुंचाई है। जिसकी जांच होना जरूरी है। अध्यक्ष नगर पालिका द्वारा कई क्रय की गई जेसीबी व अन्य वाहनों की जांच कराई जानी चाहिए, क्योंकि इसमें पूरी गड़बड़ी है। अध्यक्ष नगर पालिका द्वारा अपने समस्त वाहनों पर ईंधन व अन्य मरम्मत आदि में पूर्व से अब तक कुल कितना व्यय किया है, इसकी जांच होनी जरूरी है। इनमें भी घोटाला नजर आता है, क्योंकि वाहन कई बार जनपद व राज्य से बाहर ले जाए जाते हैं। जिसका कोई औचित्य नहीं है। नगर पालिका द्वारा क्रय की गई विद्युत सामग्री, सफाई उपकरण व दवाईयां, ब्लीचिंग पाउडर आदि के सप्लाई से संबंधित ठेके अध्यक्ष द्वारा अपने चहेते लोगों को दिए गये हैं। जिससे नगर पालिका को बहुत आर्थिक हानि पहुंचाई गई है, जिसकी जांच की जानी जरूरी है। वर्ष 2019 से वर्तमान समय तक पालिका द्वारा जितने शौचालय एवं हवाघरो के सौंदर्यीकरण और मरम्मत कार्य किये गये हैं, उन सबकी जांच की जानी आवश्यक है। क्योंकि अध्यक्ष द्वारा अपने चहेते ठेकेदारों को कार्य दिए गए हैं, जिस की मिलीभगत से नगरपालिका को काफी आर्थिक हानि पहुंची है। ऐसे ठेकेदारों द्वारा जो कार्य किए गए हैं, उनमें गुणवत्ता की पर्याप्त कमी है तथा काम भी आधे-अधूरे किए गए हैं तथा भुगतान पूर्ण किया जा चुका, पालिका द्वारा समस्त वार्डों में झाड़ी कटान/सफाई कार्यों पर कुल भुगतान की गई राशि की जांच की जाए। जिसकी जांच होना आवश्यक है। लेकिन अब सवाल ये उठता है कि भ्रष्टाचार के इस पुलंदे को बनाने में सरकारी सहयोगियों का बहुत बड़ा हाथ लिहाजा बिल्ली के गले मे घंटी कौन बांधे ये यक्ष प्रश्न उठ खड़ा हुआ है। बहरहाल प्रदेश की सरकार जिस तरह से भ्रष्टाचार मुक्त प्रदेश का राग अलाप रही है उसमें सच्चाई कितनी है वो पालिका अध्यक्ष के कारनामों से उजागर हो रही है लिहाजा इस पूरे प्रकरण की उचचस्तरीय जांच होनी चाहिए।  

Sources:jai bahadur via whatsapp